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सुंदर लाल बहुगुणा 15: पेड़ों को बचाने के लिए जीवन दांव पर लगा दिया

बड़ियारगढ में घर घर से रोटी मांगते चिपको आंदोलनकारी Click here for english version Click here for english version बडियारगढ़ में चीड़ के हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में सुंदर लाल बहुगुणा ने किया उपवास अपने 53 वें जन्मदिन पर शुरू किया उपवास तो मिलने लगा स्थानीय लोगों का समर्थन 24 दिन लंबा उपवास टिहरी और देहरादून जेल में भी जारी रहा, समर्थन में उमड़े लोग सरकार के पेड़ों की कटाई पर रोक के आश्वासन के बाद देहरादून जेल में तोड़ा उपवास इसके बाद ही पर्वतीय इलाकों में हरे पेड़ों के कटान पर रोक के लिए वन संरक्षण अधिनियम बना श्रीनगर से 32 किमी दूर बडियारगढ़ में चीड़ के हरे पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा ने अपना जीवन ही दांव पर लगा दिया। शुरू में स्थानीय लोगों का पूरा समर्थन नहीं मिला तो बहुगुणा को गांधी जी के उपवास का तरीका ही एकमात्र उपाय सूझा। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील तीखे ढालों पर हर हालत में पेड़ काटने पर उतारू वन निगम को उसकी गलती का ऐहसास दिलाने के लिए अपने 53वें जन्मदिन से उन्होंने उपवास शुरू कर दिया। बहुगुणा हरे चीड़ के पेड़ों को बचाने के लिए काटे जा रहे एक पेड़ के नीचे बैठ गए और ...

सुंदर लाल बहुगुणा 14: एक वृक्ष 10 पुत्र समान

कांगड़ में पेड़ काटने आए मजदूरों ने कुल्हाड़ी छोड़ गैंती फावड़े उठाए कहा, अब पेड़ों को काटने को नहीं उठाएंगे कुल्हाड़ी, गोरियासौड़ में गड्ढे खोदकर फलों के पौधे रोपे सुंदर लाल बहुगुणा के सिल्यारा आश्रम के ऊपर धार गांव कांगड़ के जंगल में पेड़ काटने आए श्रमिकों ने बहुगुणा की अपील पर न केवल कुल्हाड़ियां छोड़ दीं बल्कि गैंती और फावड़े उठा लिए और गोरियासौड़ में फलदार पौधे रोप कर उनकी सुरक्षा के लिए पत्थरों की दीवार बनाने में जुट गए। बहुगुणा ने उनसे नारे लगवायेः- वृक्षारोपण कार्य महान, एक वृक्ष 10 पुत्र समान। चिपको की वजह से हेंवल घाटी में ठेकेदार के माध्यम से पेड़ कटाने में असफल रहने पर वन महकमे ने टिहरी जिले के भिलंगना ब्लाॅक में वन निगम के द्वारा स्थानीय लोगों के माध्यम से पेड़ों को कटाने की योजना बनाई। अकेले धार गांव में 740 चीड़ के पेड़ काटने के लिए छापे गए थे। सिल्यारा गांव के ही पांच लोगों शक्ति प्रसाद, केदार सिंह, मोर सिह और सुंदर सिंह और सुरेशानंद को कर्मचारी बनाया और मजदूर भी स्थानीय रखे। लेकिन वे कांगड़ के ऊपर धार गांव के जंगल में चीड़ के पेड़ों का कटान शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। तब डीए...

हेंवल घाटी से बदली चिपको आंदोलन की दिशा, पीएसी लौटी बैरंग

अदवानी में वनों को बचाने को पहुंचे ग्रामीण   चिपको आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे रिचर्ड सेंट बार्बे बेकर  Click here for english version बहुगुणा ने यहीं दिया क्या हैं जंगल के उपकार मिट्टी  पानी और बयार, नारा वनों को बचाने के लिए हथकड़ी पहन कर पहली बार जेल गए आंदोलनकारी  कुंवर प्रसून ने इजाद किए आंदोलन के नए-नए तरीके, आंदोलन के लिए नारे भी गढ़े वनों को लेकर बहुगुणा के विचारों को हेंवलघाटी में मूर्त रूप मिला। यहां लोग पेड़ों को आरों से बचाने के लिए उन पर न केवल चिपक गए बल्कि पुलिस और पीएसी का सामना करने के साथ ही बाकयदा हथकड़ी पहन कर जेल भी गए। सुदर लाल बहुगुणा ने यहीं नारा दियाः- क्या हैं जंगल के उपकार मिट्टी पानी और बयार।  बहुगुणा की प्रेरणा से धूम सिंह नेगी ने स्थानीय स्तर पर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया तो कुंवर प्रसून ने आंदोलन केे लिए नए-नए तरीके इजाद किए और नारे गढ़े। आंदोलन में प्रताप शिखर, दयाल भाई, रामराज बडोनी, विजय जड़धारी, सुदेशा देवी, बचनी देवी और सौंपा देवी समेत दर्जनों महिलाओं युवाओं और छात्रों की अहम भूमिका रही। बकौल रामराज बडोनी आंदोलन सुंदर लाल ब...

स्वर्गीय बहुगुणा को मिले भारत रत्न: केजरीवाल

दिल्ली के सीएम  अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में स्व. बहुगुणा की स्मृति में पौधा रोप कर उनके चित्र का अनावरण किया  स्व.सुंदरलाल बहुगुणा ने चिपको आंदोलन के जरिए संदेश दिया कि हमें पर्यावरण को बचाना आवश्यक हैः राम निवास गोयल विस अध्यक्ष दिल्ली विधानसभा में उन लोगों के चित्र लगेंगे, जिन्होंने हमारे भारत को भारत बनाने का काम किया है: मनीष सिसोदिया नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार दिल्ली विधानसभा परिसर में गुरुवार को मेरे पिता स्व. सुंदरलाल बहुगुणा की स्मृति में पौधा रोपकर उनके चित्र का अनावरण किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि, स्व. सुंदरलाल बहुगुणा को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। इस मौके पर स्वर्गीय बहुगुणा के पुत्र प्रदीप बहुगुणा, पुत्रवधु डा. मंजू बहुगुणा और पोती सौम्या बहुगुणा भी मौजूद थे। केजरीवाल ने कहा कि स्वर्गीय बहुगुणा आज शरीरिक रूप से भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका जीवन और संदेश हमेशा हमें प्रेरणा देते रहेगा। उन्होंने कहा कि आज हम सब लोग स्व.सुंदरलाल बहुगुणा को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उन्हें याद करने के लिए एकत्र हुए हैं। मुझे ...

Tribute to Shri. Sunder Lal Bahuguna: Gandhi of the environment. Message...

Tribute to Shri. Sunder Lal Bahuguna: Gandhi of the environment. Session 3

Tribute to Shri. Sunder Lal Bahuguna : Gandhi of the environment. Session 2

स्वर्गीय पदमविभूषण श्री सुंदर लाल बहुगुणा के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर लगाएं पौधे

मेरे पिता पदमविभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा के परलोक गमन पर हमारे परिवार को दुख की इस घड़ी में साथ देने के लिए आप सभी का हृदय से आभार। शारीरिक रूप से भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वे अपने विचारों में हमेशा जिंदा रहेंगे। उनकी याद में हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और प्रकृति संरक्षण का संकल्प ले यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके जन्मदिन 9 जनवरी और पुण्यतिथि 21 मई को पौधे लगाएं। उनकी कर्मस्थली सिल्यारा से पीपल के पौधे रोपकर इसकी शुरुआत कर दी गई है। वहीं पर उनका स्मारक बनाने की भी योजना है।उनका मननना था कि पेड़ पौधे भी इनसान की भावनाओं को महसूस करते हैं। वे पेड़-पौधों को गीत संगीत सुनाने की बात करते और खुद भी पौध रोपण के समय वृक्ष मानव रिचर्ड सेंट बेकर की वृक्षों के लिए गाई प्रार्थना करते थे। आप लोग भी पौध रोपण के समय यह प्रार्थना कर सकते हैं।  स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा अपनी आवश्यकताओं को न्यूनतम कर प्रकृति से कम से कम लेने और उसका ऋण चुकाने की बात करते थे। जो कहते थे उसको अपने जीवन में भी उतारते थे। घटते भूजल के प्रति चेताते हुए उन्होंने पांच दशक से भी पहले चावल खाना इसलिए छोड़ दिया थ...

सुंदर लाल बहुगुणा:12ः वनों की नीलामी का विरोध

 सुंदर लाल बहुगुणा:12ः वनों की नीलामी का विरोध अस्कोट से आराकोट अभियान के जरिए युवाओं के चिपको आंदोलन से जुड़ने से जहां आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला वही आंदोलन का कुमाऊं में भी विस्तार हुआ। आंदोलन से छात्र और युवा बड़ी संख्या में जुड़े। 3 अक्टूबर 1974 को उत्तरकाशी में हो रही वनों की नीलामी के विरोध में सुंदर लाल बहुगुणा अपने सर्वोदयी साथियों के साथ नीलामी हाॅल में घुस गए और इसका विरोध किया। नीलामी नहीं रोके जाने पर वे पास ही के हनुमान मंदिर में उपवास पर बैठ गए। उनका यह उपवास दो हफ्ते तक चला।  उधर इसी महीने 28 तारीख को नैनीताल के शैले हाॅल में शमशेर सिंह बिष्ट की अगुवाई में छात्र और युवा हाॅल में घुस गए और वनों की नीलामी के विरोध में नारे लगाने लगे। एसडीएम के आदेश पर बिष्ट, गोपाल दत्त पांडे, शेर सिंह धौनी, खड़ग सिंह बोरा, देवेन्द्र सनवाल, बालम सिंह जनोटी, जसवंत सिंह बिष्ट और हरीश रावत समेत 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र थाने पहुंच गए। उधर अल्मोड़ा में छात्रों ने सभी स्कूल-काॅलेज और बाजार बंद करा दिए। व्यापक विरोध के चलते गिरफ्तार आ...

सुंदर लाल बहुगुणा: 11 अस्कोट से आराकोट अभियान से युवाओं को जोड़ा

  यात्रा के पदयात्री: शमशेर बिष्ट, प्रताप शिखर, शेखर पाठक और कुंवर प्रसून सुंदर लाल बहुगुणा: 11  अस्कोट से आराकोट अभियान से युवाओं को जोड़ा शराबबंदी आंदोलन की सफलता के बाद 1973 में हुए चिपको आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा ने युवाओं को कुमाऊं के अस्कोट से गढ़वाल के आराकोट तक की यात्रा के माध्यम से जोड़ा। 700 किमी की यात्रा 44 दिन में पूरी हुई। यात्रा की शुरुआत के लिए टिहरी को राजशाही की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए शहीद हुए अमर शहीद श्रीदेव सुमन के जन्मदिन 25 मई को चुना गया। अस्कोट- आराकोट अभियान में कुमाऊं से शेखर पाठक और शमशेर सिंह बिष्ट और गढ़वाल से प्रताप शिखर, कुंवर प्रसून और विजय जड़धारी इसमें शामिल हुए। ये सभी छात्र थे। बीच- बीच में कुछ और युवा भी यात्रा में शामिल हुए। यात्रा का विषय रखा गया वन संरक्षण, शराबबंदी, स्त्री शक्ति जागरण और युवा पलायन रोकना। 25 मई 1974 को पिथौरागढ़ के अस्कोट से यात्रा की शुरुआत हुई। तय हुआ कि जन सहयोग से ही यात्रा चलेगी और यात्री गांवों में रुक कर सभाओं के माध्यम से लोगों के साथ वन संरक्षण, शराबबंदी, स्त्री शक्ति जागरण और यु...

सुंदरलाल बहुगुणाः 10ः क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी पानी और बयार

      सिल्यारा गांव में पनचक्की चलाते सुंदर लाल बहुगुणा   पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों का हाल जानते सुंदर लाल बहुगुणा  सुंदरलाल बहुगुणाः 10ः  क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी पानी और बयार चिपको आंदोलन की शुरुआत वन पर गांवों के अधिकार के विचार के साथ हुई। तब यह सोच उपजी कि वनों के व्यापारिक दोहन से ही वन समाप्त हो रहे हैं। ठेकेदार मुनाफे के लिए आवंटित पेड़ों से कई ज्यादा पेड़ काट डालता है। नुकसान स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में वन सहकारी समिति के माध्यम से स्थानीय लोगों को वन आधारित रोजगार का विचार पनपा। उत्तराखंड सर्वोदय मंडल की स्थापना हुई और आनंद सिंह बिष्ट इसके अध्यक्ष बने। सर्वोदय सेवकों ने अपनी संस्थाओं के माध्यम से वन आधारित उद्योग लगाने शुरू कर दिए। चंडी प्रसाद भट्ट ने दशोली ग्राम स्वराज मंडल की स्थापना की। दशोली ग्राम स्वराज मंडल को अपनी आरा मशीन के लिए पांच पेड़ नहीं मिले उधर खेलकूद का सामान बनाने वाली इलाहाबाद की साइमन कंपनी को मार्च 1973 में चमोली जिले में अंगू के हजारों पेड़ आवंटित कर दिए गए। साइमन कंपनी ने देहरादून की सरकारी स्पोट्रर्स कंपनी ...

Sundar Lal Bahuguna 9: The rise of Chipko movement in this way

SUNDER LAL BAHUGUNA GANDHI OF THE ENVIRONMENT SUBSCRIBE Sundar Lal Bahuguna 9: The rise of Chipko movement in this way March 08, 2020 Ghanshyam Sailani and Chandi Prasad Bhatt Sundar Lal Bahuguna 9: The rise of Chipko movement During his travels, Sundar Lal Bahuguna closely understood the consequences of forest destruction and the benefits of forest protection. He observed that trees have the ability to bind soil and conserve water. For the British (who spread the Pines in the hill) and the forest department it was associated with, the forests were only a source of wood, Lisa and trading. He believed that the first use of forests should be for the people living nearby so the food, grass, wood and fodder could be easily available to them. He said that the real benefits of forests are soil, air and water. This thinking later led to the slogans of the Chipko movement: ...