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कलेंडर के आइने में पर्यावरण के गांधी सुंदर लाल बहुगुणा की जीवन यात्रा

1927- 9 जनवरी भागीरथी के किनारे टिहरी जिले के मरोड़ा गांव में जन्म। गंगा भक्त मां-बाप ने नाम दिया गंगाराम   1935 - वन अधिकारी पिता अंबादत्त बहुगुणा का निधन   1935 - पढ़ाई के लिए अपने रिश्तेदार के यहां टिहरी आए। प्रताप कॉलेज में दाखिला लिया   1940 - टिहरी रियासत के खिलाफ आजदी का बिगुल फूंकने वाले श्रीदेव सुमन के साथ टिहरी में पहली मुलाकात   1941 - राजशाही के खिलाफ नारद नाम से अखबारों में समाचार भेजना शुरू किया    1942 - राजशाही की खिलाफत करने पर अपने राजभक्त परिवार से मतभेद के चलते घर छोड़ दिया   1942 - गर्मियों की छुट्टी में मसूरी में श्रीदेव सुमन द्वारा श्रमिकों के लिए खोली गई रात्रि पाठशाला में अध्यापन   1942 - मां पूर्णा देवी का निधन ,  जुलाई के महीने  एकादशी के दिन भागीरथी में नहाने गईं और नदी में ही समां गईं  1944 - श्रीदेव सुमन को जेल में दी जा रही यातना और सुमन का जेल के अंदर ही दिया बयान अखबारों में छपवाया   1944 - समाचार छपते ही टिहरी रियासत की पुलिस ने 19 मार्च को हिरासत में लिया। हिरासत में ही बारहवीं की परीक्...

सुंदर लाल बहुगुणा 15: पेड़ों को बचाने के लिए जीवन दांव पर लगा दिया

बड़ियारगढ में घर घर से रोटी मांगते चिपको आंदोलनकारी Click here for english version Click here for english version बडियारगढ़ में चीड़ के हरे पेड़ों की कटाई के विरोध में सुंदर लाल बहुगुणा ने किया उपवास अपने 53 वें जन्मदिन पर शुरू किया उपवास तो मिलने लगा स्थानीय लोगों का समर्थन 24 दिन लंबा उपवास टिहरी और देहरादून जेल में भी जारी रहा, समर्थन में उमड़े लोग सरकार के पेड़ों की कटाई पर रोक के आश्वासन के बाद देहरादून जेल में तोड़ा उपवास इसके बाद ही पर्वतीय इलाकों में हरे पेड़ों के कटान पर रोक के लिए वन संरक्षण अधिनियम बना श्रीनगर से 32 किमी दूर बडियारगढ़ में चीड़ के हरे पेड़ों को कटने से बचाने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा ने अपना जीवन ही दांव पर लगा दिया। शुरू में स्थानीय लोगों का पूरा समर्थन नहीं मिला तो बहुगुणा को गांधी जी के उपवास का तरीका ही एकमात्र उपाय सूझा। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील तीखे ढालों पर हर हालत में पेड़ काटने पर उतारू वन निगम को उसकी गलती का ऐहसास दिलाने के लिए अपने 53वें जन्मदिन से उन्होंने उपवास शुरू कर दिया। बहुगुणा हरे चीड़ के पेड़ों को बचाने के लिए काटे जा रहे एक पेड़ के नीचे बैठ गए और ...